Monday, November 23, 2009

मैं एक आम आदमी हूँ

चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

हर तरफ से शोषित, उदास, निराश, हताश

शासक वर्ग की उपेक्षा का शिकार

अपने संशाधनों का उपयोग करने में असमर्थ ,

अपने अधिकारों से अनजान, क्षुब्ध, नाराज,

व्यवस्था की गालियाँ सुनने वाला ,

पीठ पीछे व्यवस्था को गालियाँ देने वाला,

असमर्थ हु कुछ करने में, कुछ कराने में,

मैं एक आम आदमी हूँ

3 comments:

  1. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी टिप्पणियां दें

    कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन हटा लीजिये
    वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
    डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?>
    इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना
    और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये

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  2. भाई ! इसे कविता तो नहीं कहा जा सकता .. बहुत खूबसूरत और इमानदार टिपण्णी है ..एक आम आदमी की हकीकत बयान करती हुई .. जब हम अपने सामर्थ्य और असमर्थताओं को पहचानने लगते हैं कुछ करने के रास्ते भी हमारी तलाश में निकल पड़ते हैं ..सो लिखना जारी रखिये ..संवाद बनाये रखिये ..यह दर्द जो आपके शब्दों में बयान हुआ है आपका अकेले का दर्द नहीं है हम सब आम लोगों का दर्द है.. दुश्मनी से गर लबालब है जमाना तो दोस्तों की भी कोई कमी नहीं है

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